Friday, November 16, 2018

राजस्थान का सफर

आ रहे हैं हम, फिर मिलेंगे इत्मीनान से 
साथ आ रहे कुछ दोस्त, कुछ होंगे नए अनजान से ।

आकर के इस देश में, खो जाएंगे यही 
हो जाएंगे रजपूतों से, ना रहेंगे मेहमान से ।

वीरों की इस बस्ती की, मस्ती भी है गजब 
कुछ अजब मिलेगा यहां, रह जाओगे हैरान से ।

 हम प्यार के पंछी, ओ ये गोरियों का गांव
 टुकटक निहारते इन्हें, हम दिल-ए-नादान से ।

'शिव' चाहता है दो घड़ी, जीवन में वो सुकूँ
आब-ए-हयात की चाह में, फिरते हैं परेशान से ।

© शिवजी राय 'शिव'