आ रहे हैं हम, फिर मिलेंगे इत्मीनान से
साथ आ रहे कुछ दोस्त, कुछ होंगे नए अनजान से ।
आकर के इस देश में, खो जाएंगे यही
हो जाएंगे रजपूतों से, ना रहेंगे मेहमान से ।
वीरों की इस बस्ती की, मस्ती भी है गजब
कुछ अजब मिलेगा यहां, रह जाओगे हैरान से ।
हम प्यार के पंछी, ओ ये गोरियों का गांव
टुकटक निहारते इन्हें, हम दिल-ए-नादान से ।
'शिव' चाहता है दो घड़ी, जीवन में वो सुकूँ
आब-ए-हयात की चाह में, फिरते हैं परेशान से ।
© शिवजी राय 'शिव'